Saturday, 8 October 2016

महिषासुर मर्दन


बात शायद दसवीं की है मैं अखबार पढ़ रहा था तभी एक खबर पढ़ी कि, jnu में महिषासुर दिवस मनाए जाने कि मुझे अचम्भा हुआ ।उस समय कहाँ हम इतनी कल्पना कर पाते दूसरों की सोच को अपने हिसाब से चलाने की,जो कई उर्वर मस्तिष्कों को बंजर बना दे जो समाज में सिर्फ एक सोची हुई सोच बोए। चलो अब मुद्दे पर आते हैं वो कहते हैं कि दुर्गा एक आर्य स्त्री थी और महिषासुर एक द्रविड़ और महिषासुर मर्दन जो है वो प्रतीक है आर्यों द्वारा द्रविड़ों के पतन का । धर्म तुम भी नहीं मानते हो शायद ,मैं तो नहीं ही मानता तो ये जो विमर्श है इतिहास के हिसाब से करते हैं कुछ इतिहासकार बता चुके हैं कि हैं कि जो ये आर्य द्रविड़ सिद्धांत है सिर्फ अंग्रेजों ने इसे अपने फायदे के लिए बोया । तो यहाँ भी मतभेद हैं आओ अब चलतें Biology पर यहाँ से पता चलता है कि मानव  की जो प्रजाति अभी है ,अफ्रीका से उत्पन्न हुई है तो ,जो भी भारतीय उपमहाद्वीप में मनुष्य सभी invaded लोगों के वंशज है काल अलग हो सकते हैं।
मैं अब एक नजरिया और बताता हूँ हो सकता है ये स्त्री मजबूत होने को दिखाना चाह रहा हो दुर्गा एक स्त्री है जो अपनी गरिमा जानती है और महिषासुर उन पुरूषों का प्रतीक हैं जो स्त्रियों को सिर्फ दमन के लिए और object के रूप में देखते हैं । इसीलिए मौजूं है कि अपनी गंदी राजनीति की दुकान चलाने के लिए ऐसे मुद्दों को उठाना बंद करो।
अगर आर्य द्रविड़ सिद्धांत सच भी है तो भी जिस तरह से तुम चित्रण करते हो महिषासुर मर्दन का वो फेल होता है क्योंकि खुली और निष्पक्ष आँखों से देखोगे तो पता चलेगा कि जिन्हें तुम द्रविड़ बता रहे उनमें अधिकतर मातृसत्तामक है और आर्य पितृसत्तामक, जहाँ स्त्रीयों के साथ वो आज भी निष्पक्षता नहीं कर पाए उतने पहले दुर्गा सप्तशती लिखे जाने के समय कैसे ऐसा कर सकते थे।

Wednesday, 24 August 2016

पुरस्कार राशि

क्या नायक वही होते हैं जो जंग जीतते है या फिर वो 
भी नायक है जो जंग लड़ते है ,मुझे तो लगता है प्रत्येक वो व्यक्ति नायक है जो जंग को अप्रत्याषित मोड़ तक ले जाता है । फिर क्यों धन वर्षा सिर्फ जंग जीतने वालों पर हाँ यह लेख पूरी तरह से ओलम्पिक के संदर्भ में हैंं जो जीते हैं वो तो नायक है ही पर जो हारे उनके जिम्मेदारयही है जो पुरस्कार राशि बाँटने वालों में ये तो राशि बाँटकरमौका भुनाना चाहते है अगर इतनी खेल के प्रति श्रद्धा हैतो आपकी वजह से हारे हैं उन्हें भी दीजिए नहीं लेकिन उन्हें कैसे दे वो तो इनके लिए ज्यादा मुनाफे का सौदा नहीं 15अगस्त को भारतीय दूतावास में कार्यक्रम होता है भारतीय खाने के लिए तरसते भारतीय खिलाड़ियों को भुंजी भांग की तरह मूंगफली कॉफी ,बीयरऔर चाय केसाथ पकड़ा दी जाती खिलाड़ी मन मसोस के रह जाते हैं जो कि अपना लंच छोड़ के आए थे , विकास कृष्ण 
उनका तो मैच था उस दिन । खैर देश की37 सरकारों से कहीं बेहतर सलमान रहे जिन्होंने 118 खिलाड़ियों कोराशि देने को कहा है। सरकारें 118 खिलाड़ियों के लिए एक डॉक्टर नहीं भेज पाती हैं और सिन्धु के पदक जीतने पर जाति देखी जाती है, पता लगाया जाता है कि हमारेवोटबैंक पर क्या असर पड़ेगा फिर दूसरे दिन उन दो सरकारों में से जिसे ज्यादा धनात्मक परिणाम की आशंका होती है वो पुरस्कार की घोषणा कर देती है । ये है हमारी मतलब इनकी खेल भावना

Wednesday, 17 August 2016

इमोजी और हिन्दुस्तानी लड़के

इमोजी जिसने हमें अपने दिल की बा बगैर शब्दों के कहनी सिखाई ।
इसने एक और बड़ा काम किया है जो शायद किसी क्रांति से ही संभव हो पाता हिन्दुस्तानी लड़कों को अपने दोस्तों को ये कह पाना की हम उन्हें प्यार या कितनी केयर करते हैं,अब तक जो सिर्फ शायद गालियों से ही प्यार जताया करते थे वो अब अब अपने दोस्तो के लिए प्यार कुछ शराफती अंदाज मे जता पा रहे हैं।

Friday, 3 June 2016

पौरूषत्व(paurushatv)

उसका दुनिया में आना आसान नहीं था
अगर वो आ गई
जब तक वह बच्ची थी परेशानियां कुछ कम थी
ज्यों रजोदर्शन हुआ परेशानियां और शुरु हुईं
हालांकि तब भी वह बच्ची थी
तुमने नियम बनाए रजस्वला के लिए यह सही
नियम बनाना गलत तो नहीं
इन नियमों को सही सिद्ध करने को शायद तुमने दिए होंगे कारण
क्योंकि नियम अनुसरित नहीं किए जाते अकारण
कहा होगा तुमने इससे रजस्वला को मिलेगा आराम
क्या सफाई घर की ,कपड़ों की है शक्ति रहित काम
और जैसे पूजा अर्चना में लगता हो प्रबल बल
अरे होती है उनकी माहवारी
क्यों है यह मानसिक समस्या तुम्हारी
नहीं दी अनुमति मंदिर मे कह कर
कि देह में उनकी गंदगी है रज की
फिर क्यों नहीं दिखता है वह दूषण
जब चिपक जाते हो उस हाल में उनसे प्रणय के लिए
है इच्छा यही तुम्हारी
कि पूरी हो इच्छा तुम्हारी
दूजे की इच्छा और कष्टों से
नहीं है कोई सरोकार तुम्हारा
नहीं बदलोगे तुम
क्योंकि इसी को तुम पौरूषत्व कहते हो
कहते हो तुम
यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमंते तत्र देवता
क्या खूब कहा है तुमने
बस कहा है तुमने
गालियां भी बनाई तुमने नारी की
मां या बहन की गाली देकर बताते हो तुम
कितना समझा है तुमने इन रिश्तों  और इन शब्दों की मर्यादा को
क्या यही पौरूषत्व है ?

Thursday, 2 June 2016

आरक्षण नीति(reservation policy)

औरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना मेरी आदत नहीं
मगर जो गलत है उस पर चोट करने की फितरत है ~विष्णु~

टीना दाबी ने टॉप किया ठीक है ,इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि,परीक्षा के किसी चरण में उनसे ज्यादा अंक लाने वालों की संख्या तिहाई में हो ,जो कमियां रहीं होगी वो ट्रेनिंग में चली जाएंगी । पर इस बात पर खुश होना कि, किसी आधार पर पिछड़े हुए का विकास आरक्षण की वजह से हो रहा है कहते हुए टीना से जोड़ना कहीं की होशियारी नहीं हैं। ये वो अन्तिम आदमी नहीं हैं जिसके लिए आरक्षण की बात गांधी और अम्बेडकर ने की होगी जो नीति समाजवाद के आधार पर बनाई गई थी वो पूँजीवाद के इर्द गिर्द नजर आती है। उस समय से अब तक देश की पृष्ठभूमि बदल चुकी अतः जरूरी है इस बार मंथन की। भूत पर रोना इतना जायज भी नहीं वैसे भी दुनिया में Oscar और Nobel सम्मान दोनों को गठियाने वाला इकलौता बंदा George Bernard Shaw इतनी खूबसूरती से कहता है कि,भूत इतिहास है , भविष्य रहस्य है अतः वर्तमान में रहो। मौजूं है कि आरक्षण नीति पर चर्चा होनी चाहिए वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए।

भक्त

भक्त बनने की परंपरा हमारे देश में सदियों से है ।पहले भगवान ,यहाँ तक तो ठीक था , फिर संत फिर नेता ,अभिनेता ....सबके। इन भक्तों की अपनी पहचान नहीं होती क्या, इन्हें तो कोई न कोई पूजने को चाहिए कभी कांग्रेस नेता कभी वामपंथी ,कभी भाजपाई नहीं कन्हैया भी चलेंगें हद है ऐसे चोंचलों की।विचारधारा मानने तक बात ठीक है।आदर्श होने तक तो ठीक है वैसे मेरा कोई आदर्श नहीं हैं ,हाँ कुछ लोग हैँ जो इस खांचे के आस-पास फिट बैठते हैं नीलेश मिसरा, सौरभ द्विवेदी ,मनीषा पांडेय, साइना नेहवाल बस ,पर हमसे तो भगवान की पूजा भी नहीं होती। बस बड़ी कोफ्त होती है इन भक्तों से ,इतना ही कह सकते हैं भगवान बचाए इन भक्तों से।

Friday, 15 April 2016

निठल्ले

कुछ समय पहले काफी लोग परेशान थे कि भाई ई Google पर पप्पू search करते ही राहुल क्यों नजर आते हैं । देखिए इतनी चिन्ता करने की जरुरत नहीं  ,इसके दो कारण हो सकते हैँ, पहला वो कुवाँरे है। matrimonial sites के इतने प्रचार दिखाते हुए Google भ्रमित हो गया होगा और भारत के योग्य कुवाँरों में से एक राहुल का चित्र दे दिया होगा। अब दूसरा कारण, ये है उनका युवा होना अब युवावस्था में ऊर्जा ज्यादा होती है, थोड़ा सा रसायन विज्ञान तो आप पढ़े ही होंगे जब ऊर्जा ज्यादा हो तो स्थिर नहीं रहा जा सकता तो बस इसीलिए नज़र आ जाते हैं वहाँ भी।
समाधान ये है कि,इन्तजार कीजिए उनकी युवावस्था के जाने का या उनके विवाह का,देखो सब्र रखो पर ज्यादा नहीं ,मधुमेह का खतरा है ।
नोट:इस पोस्ट से  किसी को ठेस पहुँचती है तो माफ करें।
अगर किसी को सदमा लगता है तो जाके बूढ़े साधु (old monk) का आशीर्वाद ले ले।  वैसे भी नए बजट मेंup में आशीर्वाद सस्ता हुआ है ,और सस्ता चाहिए तो गोवा का रूख कीजिए बिहार से हमदर्दी है